मई दिवस के अवसर पर मसूरी में मजदूरों ने एकजुटता का परिचय देते हुए भव्य रैली का आयोजन किया। संयुक्त मई दिवस समारोह समिति के नेतृत्व में यह रैली अनुपम चौक से गांधी चौक तक निकाली गई, जिसमें सैकड़ों मजदूरों ने भाग लेकर अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया।
रैली के दौरान मजदूरों ने श्रमिक अधिकारों, न्यूनतम वेतन और श्रम कानूनों में बदलाव के खिलाफ आवाज बुलंद की। इस अवसर पर 1 मई 1886 को अमेरिका के शिकागो में हुए ऐतिहासिक मजदूर आंदोलन को याद किया गया, जब “8 घंटे काम, 8 घंटे आराम और 8 घंटे मनोरंजन” की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे मजदूरों पर पुलिस फायरिंग हुई थी, जिसमें कई मजदूर शहीद हुए थे।
मजदूर संघ के अध्यक्ष आरपी बडोनी ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें श्रम कानूनों में बदलाव कर पूंजीपतियों को फायदा पहुंचा रही हैं, जिससे मजदूर वर्ग प्रभावित हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मजदूरों को उनका हक—न्यूनतम वेतन—मिलना चाहिए, अन्यथा जून के पहले सप्ताह में व्यापक हड़ताल की जाएगी।
वहीं मजदूर नेता शोभन पवार ने आंगनवाड़ी, आशा कार्यकर्ताओं और भोजन माताओं के मुद्दों को उठाते हुए कहा कि मजदूर संघ इन सभी वर्गों की लड़ाई लड़ेगा और उन्हें एक मंच पर लाने का प्रयास करेगा। उन्होंने नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी पर मजदूरों को विभाजित करने का आरोप भी लगाया।
गोल्फ कार्ट संचालन को लेकर भी मजदूरों ने कड़ा रुख अपनाया। उनका कहना है कि यदि इस व्यवस्था में स्थानीय मजदूरों को शामिल नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
रैली के माध्यम से मजदूरों ने अपनी एकता और ताकत का प्रदर्शन किया, साथ ही सरकार को अपनी मांगों पर जल्द कार्रवाई करने की चेतावनी दी।












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