उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में राज्य के विकास, शिक्षा, परिवहन, वन और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कुल 17 अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन फैसलों का सीधा असर आम जनता, छात्रों और विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली पर पड़ेगा।
कुंभ 2027 की तैयारियों को मिली रफ्तार
कैबिनेट ने हरिद्वार में होने वाले कुंभ मेला 2027 के स्थायी और अस्थायी कार्यों की स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बना दिया है। अब 1 करोड़ रुपये तक के कार्य मेलाधिकारी, 5 करोड़ रुपये तक के कार्य गढ़वाल मंडल आयुक्त और इससे अधिक के कार्य शासन स्तर से स्वीकृत होंगे।
परिवहन विभाग में बड़े फैसले
राज्य में 250 नई बसों की खरीद को मंजूरी दी गई है। साथ ही जीएसटी दरों में कमी के चलते पहले स्वीकृत 100 बसों की संख्या बढ़ाकर 109 कर दी गई है। प्रवर्तन चालकों के लिए नई वर्दी का भी निर्धारण किया गया है, जो पुलिस विभाग के चालकों के अनुरूप होगी।
मदरसा शिक्षा में नई व्यवस्था लागू
अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए राज्य के 452 मदरसों के लिए नई प्रणाली लागू की गई है। कक्षा 1 से 8 तक संचालित मदरसों को अब जिला स्तर पर मान्यता दी जाएगी, जबकि कक्षा 9 से 12 तक के संस्थानों को रामनगर स्थित विद्यालयी शिक्षा परिषद से संबद्ध होना अनिवार्य होगा।
वन विभाग और रोजगार से जुड़े फैसले
वन दरोगा के लिए शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट से बढ़ाकर स्नातक कर दी गई है। आयु सीमा 21 से 35 वर्ष तय की गई है, जबकि वन आरक्षी के लिए 18 से 25 वर्ष निर्धारित की गई है। साथ ही, मधुमक्खी पालन नीति को मंजूरी दी गई है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में मदद मिलेगी।
अन्य प्रमुख निर्णय:
- वित्त विभाग: आबकारी नीति के तहत 6% वैट को नियमावली में शामिल किया गया।
- खनन विभाग: उपखनिज पर रॉयल्टी दर 7 रुपये से बढ़ाकर 8 रुपये प्रति कुंतल की गई।
- संस्कृत शिक्षा: नई सेवा नियमावली लागू, शिक्षकों के प्रमोशन का रास्ता साफ।
- कार्मिक विभाग: एकल संवर्ग के लिए स्पष्ट एसओपी तैयार की जाएगी।
- लोक निर्माण विभाग: जेई भर्ती और दिव्यांग पदों के सृजन को मंजूरी।
- ठेकेदारी व्यवस्था: डी श्रेणी के ठेकेदारों की निविदा सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 1.5 करोड़ की गई।
- उच्च शिक्षा: मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना अब अनुदानित कॉलेजों में भी लागू होगी।
- विधिक सेवा: जिला सैनिक कल्याण अधिकारी को विधिक सेवा प्राधिकरण में पदेन सदस्य बनाया जाएगा और एसिड अटैक पीड़ितों को मुफ्त कानूनी सहायता में शामिल किया गया है।
सरकार का मानना है कि ये फैसले राज्य के विकास को नई गति देंगे और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाएंगे।












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