लंढौर बाजार में दुकान खाली कराने के नोटिस पर बवाल, स्थानीय लोगों का विरोध तेज

मसूरी के लंढौर बाजार में भू-धंसाव के खतरे के बीच प्रशासन की कार्रवाई को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एक दुकान स्वामी को नोटिस जारी किए जाने के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया है और उन्होंने इस फैसले को पक्षपातपूर्ण बताया है।

छह भवन जर्जर घोषित, कार्रवाई सिर्फ एक पर

नगर पालिका परिषद मसूरी, आपदा प्रबंधन विभाग और प्रशासन द्वारा किए गए सर्वे में क्षेत्र के लगभग छह भवनों को गिरासू (जर्जर) श्रेणी में चिन्हित किया गया था। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा केवल एक दुकान को खाली करने का नोटिस जारी किए जाने से लोगों में नाराजगी है।

“चयनात्मक कार्रवाई” का आरोप

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब कई भवन खतरे में हैं, तो सिर्फ एक दुकान को निशाना बनाना गलत है। लोगों ने इसे सुनियोजित कार्रवाई बताते हुए प्रशासन पर सवाल उठाए हैं।

विधवा महिला की आजीविका पर संकट

नोटिस जिस दुकान को दिया गया है, वहां सरोजनी राणा नामक महिला पिछले 25 वर्षों से दुकान चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें बिना पूर्व सूचना के तीन दिन के भीतर दुकान और मकान खाली करने का आदेश दिया गया है।

सरोजनी राणा ने कहा कि वह एक विधवा हैं और उनकी दो बेटियां हैं, जिनकी पढ़ाई और घर का खर्च इसी दुकान से चलता है। अचानक मिले नोटिस से उनके सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

पुनर्वास की कोई व्यवस्था नहीं

स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने प्रभावित लोगों के लिए न तो पुनर्वास की कोई योजना बनाई है और न ही वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था की गई है।

पूर्व विधायक ने उठाए सवाल

पूर्व विधायक जोत सिंह गुमसुला ने इस कार्रवाई को लेकर प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मसूरी में करीब 58 भवन जर्जर स्थिति में हैं, लेकिन कार्रवाई सिर्फ एक महिला के खिलाफ हो रही है।

उन्होंने कहा कि सभी प्रभावितों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए और किसी भी हाल में महिला के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

80 साल पुराना कारोबार भी खतरे में

स्थानीय निवासी कुशाल सिंह राणा ने बताया कि उनके परिवार द्वारा करीब 80 वर्षों से इस स्थान पर दुकान चलाई जा रही है। उनका कहना है कि प्रशासन को नोटिस जारी करने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी।

समाधान की मांग

मामले को लेकर क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोग प्रशासन से निष्पक्ष जांच और प्रभावित परिवार को राहत देने की मांग कर रहे हैं।

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