तहसील बड़कोट के नगाण गांव में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का मार्मिक वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा के पांचवें दिन का आयोजन विशेष रूप से भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
कथा व्यास आयुष कृष्ण नयन महाराज जी ने अपने प्रवचन में बताया कि मनुष्य को अपने जीवन का नियंत्रण ईश्वर के हाथों में सौंप देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा से प्रभु पर विश्वास करता है और स्वयं को उनका सेवक मानता है, तब उसके जीवन से भय, चिंता और असमंजस स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
यह धार्मिक आयोजन भाजपा नेता मनवीर सिंह चौहान की स्वर्गीय धर्मपत्नी की वार्षिक श्रद्धांजलि एवं पितरों के मोक्ष की कामना के लिए आयोजित किया जा रहा है। कथा के दौरान श्रीकृष्ण की बाल सुलभ चंचलता, ग्वाल-बालों के साथ उनकी लीलाएं और उनकी दिव्य छवि ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
कथा व्यास ने पूतना वध प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने दैत्यनी पूतना का उद्धार कर उसे मोक्ष प्रदान किया। इस प्रसंग के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि भगवान केवल अपने भक्तों का ही नहीं, बल्कि दुष्टों का भी कल्याण करते हैं।
इसके बाद गर्गाचार्य द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के नामकरण संस्कार की कथा का वर्णन किया गया। कथा में उनके विभिन्न नामों के पीछे छिपे आध्यात्मिक अर्थों को विस्तार से समझाया गया, जिससे श्रोता गहराई से प्रभावित हुए। पूरा पंडाल “जय श्रीकृष्ण” के उद्घोष से गूंज उठा।
अंत में कथा व्यास ने भक्ति की महिमा का वर्णन करते हुए सभी श्रद्धालुओं को भगवान की भक्ति में लीन रहने और जीवन को धर्ममय बनाने का संदेश दिया।












Leave a Reply