उत्तराखंड विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र को लेकर राज्य में सियासी घमासान तेज हो गया है। महिला आरक्षण के मुद्दे पर बुलाए गए इस सत्र को लेकर कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे पूरी तरह निरर्थक बताया है।
कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता प्रतिमा सिंह ने कहा कि इस सत्र का कोई स्पष्ट एजेंडा सामने नहीं आया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार खुद यह तय नहीं कर पाई कि सत्र बुलाने की असली वजह क्या है। उनके अनुसार, यह सत्र सिर्फ औपचारिकता निभाने के लिए आयोजित किया गया।
प्रतिमा सिंह ने बयान में कहा, “कांग्रेस लगातार महिला आरक्षण, रोजगार और जनहित के मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रही है। सरकार उसी दबाव में इस तरह के सत्र बुला रही है, लेकिन इनमें कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा।”
उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष के खिलाफ कोई निंदा प्रस्ताव तक पेश नहीं किया गया और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की समस्याओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा से बचा गया।
कांग्रेस ने पलायन, महिलाओं की सुरक्षा और रोजगार के मुद्दों को उठाते हुए कहा कि जनता के टैक्स के पैसे से बुलाए गए इस विशेष सत्र का कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।
पार्टी का यह भी आरोप है कि सरकार के पास अपने कामों को दिखाने के लिए कोई ठोस उपलब्धियां नहीं हैं, इसलिए पुराने मुद्दों को उछालकर जनता का ध्यान भटकाया जा रहा है।












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