उत्तराखंड में तेजी से बढ़ रहे पलायन को रोकने और खाली होते गांवों को फिर से आबाद करने के उद्देश्य से “अपनी गणना अपना गांव” अभियान को व्यापक स्तर पर चलाया जा रहा है। अभियान के मुख्य संयोजक जोत सिंह बिष्ट ने कहा कि यह पहल केवल जनगणना तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों को नई पहचान और नई ऊर्जा देने का प्रयास है।
उन्होंने बताया कि वर्षों से रोजगार और बेहतर सुविधाओं की तलाश में लोग गांव छोड़कर शहरों की ओर जा रहे हैं, जिससे कई गांव वीरान हो चुके हैं। लॉकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासियों ने अपने गांव लौटकर वहां की सुरक्षा, शांति और आत्मीयता को महसूस किया। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए अब लोगों से अपने गांवों में आकर अपनी गणना कराने की अपील की जा रही है।
जोत सिंह बिष्ट ने कहा कि हाल ही में आयोजित ब्लॉक प्रमुखों की बैठक में 61 ब्लॉक प्रमुखों ने अभियान को समर्थन देने का भरोसा दिलाया है। अब बीडीसी बैठकों और ग्राम प्रधानों के माध्यम से अधिक से अधिक प्रवासियों तक पहुंच बनाई जाएगी, ताकि वे गांवों से दोबारा जुड़ सकें।
उन्होंने बताया कि 23 और 24 तारीख को दिल्ली में प्रवासी संगठनों के साथ विचार-विमर्श कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन बैठकों के जरिए शहरों में रह रहे उत्तराखंड के लोगों को गांवों के विकास और पुनर्बसावट के लिए प्रेरित किया जाएगा।













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