रुद्रप्रयाग: जनपद की किशोरियों और बालिकाओं के सर्वांगीण विकास को नई दिशा देने के लिए जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा की पहल पर ‘प्रोजेक्ट स्नेह’ की शुरुआत की जा रही है। यह अभियान 1 अगस्त 2026 से पूरे जनपद में शुरू होगा। इसका उद्देश्य बालिकाओं को ऐसा सुरक्षित और भरोसेमंद मंच उपलब्ध कराना है, जहां वे बिना किसी झिझक के अपनी समस्याएं साझा कर सकें और विशेषज्ञों से उचित परामर्श प्राप्त कर सकें।
जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि कई बार किशोरियां अपनी व्यक्तिगत, सामाजिक या पारिवारिक परेशानियां परिवार, शिक्षकों या परिचितों से साझा नहीं कर पाती हैं। ऐसे में ‘प्रोजेक्ट स्नेह’ उनके लिए विश्वास का एक मजबूत माध्यम बनेगा। इस अभियान के तहत प्रशिक्षित विशेषज्ञ बालिकाओं से संवाद करेंगे, उनकी समस्याओं को गोपनीयता के साथ सुनेंगे और उन्हें उचित काउंसलिंग व मार्गदर्शन उपलब्ध कराएंगे।
अभियान के दौरान बालिकाओं को करियर काउंसलिंग, व्यक्तित्व विकास, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक और मानसिक बदलाव, स्वास्थ्य एवं पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, महिला एवं बाल अधिकार, बाल विवाह निषेध, साइबर सुरक्षा, गुड टच-बैड टच, लैंगिक समानता और विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य बालिकाओं को आत्मनिर्भर, जागरूक और आत्मविश्वासी बनाना है।
इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, बाल कल्याण समिति (CWC) सहित विभिन्न विभागों की संयुक्त टीम बनाई जाएगी। अभियान की शुरुआत से पहले 1 अगस्त को संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित होगी, जिसमें विशेषज्ञ संवेदनशील संवाद, प्रभावी काउंसलिंग, मनोवैज्ञानिक समझ और गोपनीयता बनाए रखने जैसे विषयों पर प्रशिक्षण देंगे।
‘प्रोजेक्ट स्नेह’ को तीन चरणों में लागू किया जाएगा। पहले चरण में विद्यालयों में जाकर बालिकाओं से संवाद किया जाएगा। दूसरे चरण में प्राप्त समस्याओं का विश्लेषण कर उनके मूल कारणों को समझते हुए समाधान की रणनीति तैयार की जाएगी। तीसरे चरण में इस पहल का विस्तार ग्राम पंचायत और विकासखंड स्तर तक किया जाएगा, ताकि जनपद की अधिक से अधिक किशोरियों और बालिकाओं तक इस अभियान का लाभ पहुंच सके।
जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कहा कि ‘प्रोजेक्ट स्नेह’ केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि बालिकाओं के विश्वास, सुरक्षा, आत्मसम्मान और उज्ज्वल भविष्य को मजबूत करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि हर बालिका को अपनी बात रखने, सुने जाने और समय पर सही मार्गदर्शन मिलने का अधिकार है। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि जनपद की कोई भी बालिका स्वयं को असुरक्षित या अकेला महसूस न करे और जरूरत पड़ने पर उसे हर संभव सहयोग उपलब्ध कराया जाए।














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