सरकारी अस्पतालों में सख्ती का दौर: “बाहर की दवा” पर रोक, स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा संदेश

देहरादून: राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए स्वास्थ्य मंत्री ने दून मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया और कई खामियों पर नाराज़गी जताई। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अब सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बाहर से दवाइयां लिखने की प्रथा खत्म करनी होगी।

नई सुविधाएं शुरू, लेकिन असर दिखना जरूरी

निरीक्षण के दौरान अस्पताल में कई नई सुविधाओं का शुभारंभ किया गया, जिनमें ऑक्यूपेशनल थेरेपी, हर मंजिल पर रजिस्ट्रेशन काउंटर, स्पोर्ट्स इंजरी क्लिनिक, आधुनिक पैथोलॉजी लैब और एनेस्थीसिया सेवाएं शामिल हैं।
मंत्री ने कहा कि इन सुविधाओं का असली उद्देश्य मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज देना है, इसलिए इनका लाभ जमीनी स्तर पर दिखना चाहिए।

डॉक्टरों को चेतावनी: बाहर की दवा लिखी तो होगी कार्रवाई

मंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बाहर की दवा लिखना न सिर्फ गलत है, बल्कि गरीब मरीजों के साथ अन्याय भी है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे डॉक्टरों की पहचान कर तुरंत कार्रवाई की जाए।

निजी अस्पतालों की बढ़ती भीड़ बनी चिंता

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने यह भी माना कि बड़ी संख्या में मरीज निजी अस्पतालों की ओर जा रहे हैं, जो चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में साफ-सफाई, बेहतर प्रबंधन और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि लोगों का भरोसा दोबारा कायम हो सके।

दून अस्पताल को मिलेगा मॉडल का दर्जा

अस्पताल परिसर में पार्किंग, विस्तार कार्य और सफाई व्यवस्था को लेकर मंत्री ने असंतोष जताया।
उन्होंने निर्देश दिए कि दून अस्पताल को एक आदर्श स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित किया जाए, जहां मरीजों को सम्मानजनक माहौल और बेहतर सुविधाएं मिलें।

रोस्टर सिस्टम से दूरदराज इलाकों को मिलेगा फायदा

सरकार अब डॉक्टरों की रोस्टर पोस्टिंग की योजना बना रही है। इसके तहत विशेषज्ञ डॉक्टरों को जरूरत के हिसाब से विभिन्न क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा, जिससे ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में भी बेहतर इलाज संभव हो सकेगा।

PHC तक अल्ट्रासाउंड सेवा पहुंचाने की तैयारी

स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर तक मजबूत करने के लिए सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) तक अल्ट्रासाउंड सुविधा पहुंचाने का फैसला लिया है।
इसके लिए रेडियोलॉजिस्ट की कमी को दूर करने हेतु ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर निजी संस्थानों का सहयोग लिया जाएगा।

सख्त संदेश: अब लापरवाही नहीं चलेगी

सरकार का साफ संदेश है कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यदि निर्देशों का सही तरीके से पालन हुआ, तो राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

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