देहरादून को ‘ग्रीन सिटी’ बनाने का मेगा प्लान, अतिक्रमण मुक्त जमीन पर बनेंगे नए पार्क

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून को स्वच्छ, हराभरा और बेहतर शहरी सुविधाओं वाला शहर बनाने की दिशा में नगर निगम ने बड़ा कदम उठाया है। शहर को ‘ग्रीन सिटी’ के रूप में विकसित करने के लिए नगर निगम ने एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। इस योजना के तहत अतिक्रमण से मुक्त कराई गई जमीनों पर नए पार्क विकसित किए जाएंगे, जबकि मौजूदा हरित क्षेत्रों को भी बेहतर सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा।

नगर निगम के अनुसार, वर्तमान बोर्ड के कार्यकाल में शहर के अलग-अलग इलाकों में करीब 25 नए पार्क विकसित कर जनता को समर्पित किए जा चुके हैं। अब अगला लक्ष्य शहर के प्रत्येक वार्ड और मोहल्ले तक हरियाली और सार्वजनिक पार्कों की सुविधा पहुंचाना है।

अतिक्रमण हटाकर तैयार होंगे नए पार्क

मेयर ने बताया कि नगर निगम लगातार शहर में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चला रहा है। जिन सरकारी जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा रहा है, उन्हें चिन्हित कर वहां सुंदर और उपयोगी पार्क विकसित किए जाएंगे। इसके लिए निगम की टीमें लगातार निरीक्षण कर रही हैं और उपयुक्त भूमि का चयन किया जा रहा है।

बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए होंगी आधुनिक सुविधाएं

नगर निगम का प्रयास केवल पार्क बनाना नहीं, बल्कि उन्हें सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए उपयोगी बनाना भी है। नए पार्कों में बच्चों के लिए आधुनिक खेल उपकरण लगाए जाएंगे। वहीं युवाओं और फिटनेस पसंद लोगों के लिए ओपन जिम की सुविधा उपलब्ध होगी।

इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों और मॉर्निंग वॉक करने वालों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित वॉकिंग ट्रैक भी तैयार किए जाएंगे, ताकि लोग बेहतर वातावरण में स्वास्थ्य लाभ ले सकें।

‘हरियाला पर्व’ के जरिए घर-घर पहुंच रहे पौधे

शहर में हरियाली बढ़ाने के लिए नगर निगम केवल पार्कों के निर्माण तक सीमित नहीं है। ‘हरियाला पर्व’ अभियान के तहत लोगों को घर-घर जाकर विभिन्न प्रकार के पौधे वितरित किए जा रहे हैं। इनमें औषधीय गुणों वाले सहजन और सब्जियों के पौधे भी शामिल हैं, ताकि लोग अपने घरों और गमलों में भी हरियाली बढ़ा सकें।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

नगर निगम का मानना है कि यह पहल देहरादून को अधिक हराभरा, स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही शहरवासियों को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराने में भी यह योजना मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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