गुरु-शिष्य परंपरा के साथ पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल, मंत्री भरत सिंह चौधरी ने शुरू किया अभियान

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उत्तराखंड के ग्राम्य विकास एवं पंचायतीराज मंत्री भरत सिंह चौधरी ने पर्यावरण संरक्षण को भारतीय संस्कृति की गुरु-शिष्य परंपरा से जोड़ते हुए एक अनूठी पहल की शुरुआत की।

मंत्री चौधरी ने तल्ला नागपुर क्षेत्र के क्वीली गांव में अपने गुरु पंडित पूर्णानंद पुरोहित के जन्मस्थल पर पहुंचकर “एक पेड़ गुरु के नाम” अभियान का विधिवत शुभारंभ किया।

गुरु के 100वें जन्मदिवस पर विशेष सम्मान

गुरु पूर्णानंद पुरोहित के 100वें जन्मदिवस के अवसर पर मंत्री ने उन्हें भोजपत्र की माला और उत्तराखंड के राजकीय पुष्प ब्रह्मकमल भेंट कर सम्मानित किया। इसके बाद उन्होंने गुरु के सम्मान में चंदन का पौधा रोपित कर गुरुदक्षिणा अर्पित की।

मंत्री ने कहा कि उन्हें अपने गुरु का आशीर्वाद हमेशा मिलता रहा है और उनके मार्गदर्शन ने ही उन्हें जनसेवा के पथ पर आगे बढ़ाया है।

हरेला पर्व तक चलेगा अभियान

उन्होंने बताया कि यह अभियान विश्व पर्यावरण दिवस से शुरू होकर हरेला पर्व की समाप्ति तक हर वर्ष चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल वृक्षारोपण नहीं, बल्कि नई पीढ़ी में गुरुजनों के प्रति सम्मान और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है।

जन आंदोलन बनाने की अपील

मंत्री चौधरी ने पंचायत प्रतिनिधियों, महिला मंगल दलों, स्वयं सहायता समूहों और सामाजिक संगठनों से इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह पहल एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकती है।

स्कूलों और युवाओं को जोड़ा जाएगा

उन्होंने कहा कि इस अभियान को विद्यालयों और शिक्षण संस्थानों तक भी पहुंचाया जाएगा। गुरु पूर्णिमा, वार्षिकोत्सव और विदाई समारोह जैसे अवसरों पर छात्र अपने गुरु के नाम पौधारोपण कर सकते हैं।

मंत्री ने “गुरु स्मृति वन” बनाने का भी सुझाव दिया, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ गुरुजनों के प्रति सम्मान की भावना मजबूत होगी।

प्रधानमंत्री के अभियान से प्रेरित पहल

मंत्री ने बताया कि यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “एक पेड़ मां के नाम” अभियान से प्रेरित है। उनका मानना है कि यदि हर व्यक्ति अपने गुरु के सम्मान में एक पौधा लगाए, तो यह पर्यावरण और संस्कृति दोनों को सशक्त करेगा।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी

इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य जयवर्धन कांडपाल, गंभीर सिंह बिष्ट, कनिष्ठ प्रमुख श्रीमती सविता भंडारी, नंदा नाभ्या सेवा ट्रस्ट के पदाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

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