रुद्रप्रयाग: सेवा, सुशासन एवं समर्पण अभियान के तहत राजकीय इंटर कॉलेज चन्द्रनगर में ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उपजिलाधिकारी ऊखीमठ अनिल रावत ने की। इस दौरान विभिन्न विभागों ने स्टॉल लगाकर केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाई तथा पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ भी उपलब्ध कराया।
कार्यक्रम में अधिकारियों ने आमजन से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। शिविर के दौरान कुल 35 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 16 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। शेष शिकायतों के शीघ्र समाधान के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए।
शिविर में स्वास्थ्य, समाज कल्याण, कृषि, उद्यान, बाल विकास और अन्य विभागों के अधिकारियों ने अपनी-अपनी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही नशा मुक्त भारत अभियान के तहत अधिकारियों, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों को नशामुक्ति की शपथ भी दिलाई गई।
उपजिलाधिकारी अनिल रावत ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य लोगों की समस्याओं का अधिकतम समाधान मौके पर ही करना और विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है। उन्होंने गढ़वाली भाषा में ग्रामीणों से स्वरोजगार अपनाने की अपील करते हुए कहा कि होमस्टे, फूलों की खेती, सब्जी उत्पादन, दुग्ध उत्पादन तथा कोदा-जंगोरा जैसी पारंपरिक फसलों के माध्यम से अपनी आय बढ़ाई जा सकती है।
कार्यक्रम में सीमांत अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष चंडी प्रसाद भट्ट ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ आज गांव-गांव तक पहुंच रहा है। उन्होंने महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने, युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार अपनाने तथा किसानों को आधुनिक कृषि और पर्यटन आधारित गतिविधियों से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कार्तिक स्वामी क्षेत्र को पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने और पर्यटन विभाग की होमस्टे योजना का लाभ लेने पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम का संचालन किशन सिंह रावत ने किया। इस अवसर पर पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष शकुन्तला जगवाण, भाजपा मंडल अध्यक्ष बृजमोहन सिंह नेगी, विभिन्न ग्राम प्रधान, जिला सेवायोजन अधिकारी सुशील चमोली, समाज कल्याण अधिकारी टी.आर. मलेठा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
















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