केदारनाथ धाम में वीआईपी दर्शन व्यवस्था को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। तीर्थ पुरोहितों ने इस व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे धार्मिक समानता के सिद्धांत के विपरीत बताया है।
तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि भगवान के दरबार में सभी श्रद्धालु समान हैं, लेकिन वीआईपी व्यवस्था के कारण आम भक्तों को लंबी कतारों में घंटों इंतजार करना पड़ता है, जबकि कुछ लोगों को प्राथमिकता के आधार पर सीधे दर्शन की सुविधा मिल जाती है। उन्होंने इसे आस्था के साथ अन्याय बताते हुए इस व्यवस्था को समाप्त करने की मांग की है।
प्रदर्शन कर रहे पुरोहितों ने प्रशासन से स्पष्ट मांग की है कि केदारनाथ धाम में सभी श्रद्धालुओं के लिए एक समान दर्शन प्रणाली लागू की जाए, ताकि किसी के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो।
वहीं इस पूरे विवाद पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने तीर्थ पुरोहितों के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उन्होंने कहा कि धाम में किसी भी प्रकार की वीआईपी दर्शन व्यवस्था लागू नहीं है।
महेंद्र भट्ट ने कहा कि “बाबा केदार सभी भक्तों को समान रूप से दर्शन देते हैं, यहां किसी प्रकार का वीआईपी कल्चर नहीं है।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कुछ लोग इस धार्मिक विषय को बेवजह राजनीतिक रूप देने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रशासन का दावा है कि केदारनाथ धाम में दर्शन व्यवस्था पूरी तरह समान और सुव्यवस्थित है तथा सभी श्रद्धालुओं को एक जैसी सुविधा प्रदान की जा रही है।
फिलहाल इस मुद्दे पर तीर्थ पुरोहितों और प्रशासन के बीच मतभेद बने हुए हैं, जिससे धाम की व्यवस्थाओं को लेकर बहस तेज हो गई है।














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