देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में जंगली जानवरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। बंदर और जंगली सूअरों के बाद अब भालू भी किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर देहरादून स्थित वन मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया गया।
राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी का विरोध प्रदर्शन
राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के कार्यकर्ताओं ने वन मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए वन विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने वाइल्डलाइफ वार्डन को ज्ञापन सौंपकर भालू द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाने पर मुआवजा देने की मांग उठाई।
किसानों को हो रहा भारी नुकसान
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में भालू लगातार खेतों में घुसकर फसलें बर्बाद कर रहे हैं।
हालांकि, वर्तमान में:
- बंदर और जंगली सूअरों से नुकसान पर कुछ प्रावधान हैं
- लेकिन भालू द्वारा फसल नुकसान पर कोई मुआवजा नीति नहीं है
इस कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
सरकार से नीति बनाने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि वन विभाग जल्द से जल्द ऐसी नीति बनाए, जिसमें भालू द्वारा फसल नुकसान को भी मुआवजे के दायरे में शामिल किया जाए।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो किसानों की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष
विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों में भोजन की कमी और बढ़ते मानव हस्तक्षेप के कारण जंगली जानवर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार बढ़ रहा है।
वन मुख्यालय के बाहर हुआ यह प्रदर्शन राज्य में किसानों की गंभीर समस्या को उजागर करता है। अब देखना होगा कि सरकार इस मांग पर क्या कदम उठाती है और किसानों को राहत देने के लिए नई नीति कब तक बनती है।














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