भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने संस्थापक विचारकों में शामिल डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर प्रदेशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें वैचारिक श्रद्धांजलि अर्पित की। पार्टी के “समर्पण पखवाड़ा” के तहत बूथ स्तर से लेकर प्रदेश मुख्यालय तक आयोजित कार्यक्रमों में डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचारों, देश की एकता और अखंडता में उनके योगदान को याद किया गया।
देहरादून स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय में आयोजित मुख्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष नरेश बंसल ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को राष्ट्रवादी राजनीति का पुरोधा बताया। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी एक प्रख्यात शिक्षाविद, समाज सुधारक, न्यायविद और दूरदर्शी नेता थे। बंसल ने कहा कि कम उम्र में कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति बनने के बावजूद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार किए और अपने राष्ट्रवादी विचारों के कारण कई चुनौतियों का सामना भी किया।
अपने संबोधन में नरेश बंसल ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल और कश्मीर के भारत के साथ जुड़े रहने में डॉ. मुखर्जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने तत्कालीन केंद्र सरकार की नीतियों से असहमति जताते हुए मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया था। उन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), अनुच्छेद 370 और जनसंघ की स्थापना का उल्लेख करते हुए इन्हें डॉ. मुखर्जी के विचारों की निरंतरता बताया।
भाजपा नेता ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने “एक देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान” का विरोध करते हुए राष्ट्रीय एकता के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि आज केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई कई योजनाएं, जैसे गरीबों को मुफ्त राशन, जल जीवन मिशन, उज्ज्वला योजना, किसान सम्मान निधि, आयुष्मान भारत और जन औषधि केंद्र जैसी पहलें जनसेवा और राष्ट्र निर्माण के उसी विचार को आगे बढ़ाती हैं, जिसकी प्रेरणा डॉ. मुखर्जी के चिंतन से मिलती है।
कार्यक्रम में टिहरी सांसद महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह, प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार, प्रदेश कोषाध्यक्ष पुनीत मित्तल, प्रदेश कार्यालय सचिव जगनमोहन रावत, प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।
















Leave a Reply