उत्तराखंड का पारंपरिक लोकपर्व हरेला इस बार भी पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के संदेश के साथ मनाया जाएगा। राज्यभर में 16 जुलाई को आयोजित होने वाले इस पर्व के लिए विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाएं तैयारियों में जुट गई हैं।
संस्कृति, कला, साहित्य परिषद की उपाध्यक्ष मधु भट्ट ने बताया कि 15 जुलाई से विशेष जनजागरूकता अभियान की शुरुआत होगी। इसमें विद्यालयों के छात्र-छात्राएं, सामाजिक संगठन और स्थानीय नागरिक सक्रिय रूप से भाग लेंगे। अभियान का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को प्रकृति संरक्षण के महत्व से जोड़ना है।
उन्होंने कहा कि हरेला पर्व उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पर्व लोगों को हरियाली बढ़ाने, पौधों की रक्षा करने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता है। इसी सोच को आगे बढ़ाने के लिए परिषद लगातार प्रयास कर रही है।
मधु भट्ट ने बताया कि अभियान केवल हरेला पर्व तक सीमित नहीं रहेगा। वर्षभर विभिन्न स्थानों पर पौधरोपण, पौध वितरण और पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि समाज में हरियाली के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हो सके।
परिषद का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ा जाए और हरेला पर्व को पर्यावरण संरक्षण के एक प्रभावी जनआंदोलन के रूप में स्थापित किया जाए। लोगों की भागीदारी से ही उत्तराखंड की प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित और समृद्ध बनाया जा सकेगा।
















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