देहरादून के किशनपुर स्थित मदरसा इमदादूल उलूम में उत्तराखंड राज्य बाल संरक्षण अधिकार आयोग की टीम ने औचक निरीक्षण कर कई गंभीर खामियों का खुलासा किया है। निरीक्षण के दौरान मदरसे के बेसमेंट में हॉस्टल संचालित होता मिला, जहां छोटे कमरों में बड़ी संख्या में बच्चों को रखा गया था।
आयोग की टीम को यहां बिहार सहित अन्य राज्यों के करीब 85 बच्चे मिले, जबकि स्थानीय बच्चों की संख्या बेहद कम पाई गई। बताया जा रहा है कि निरीक्षण विभिन्न शिकायतों और एक प्रतिष्ठित एनजीओ की ओर से यौन शोषण संबंधी आरोपों के बाद किया गया।
बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
निरीक्षण के दौरान टीम ने पाया कि मदरसे में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। साथ ही भवन संबंधी मानकों और नक्शे को लेकर भी अनियमितताएं सामने आईं। बेसमेंट में संचालित हॉस्टल में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को रखा गया था, जिससे सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है।
उत्तराखंड राज्य बाल संरक्षण अधिकार आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने बताया कि मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। संबंधित विभागों और प्रशासन को जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
बच्चों ने बताई यहां आने की वजह
आयोग की टीम ने बच्चों से भी बातचीत की। बच्चों ने बताया कि उनके माता-पिता जीवित हैं और बेहतर शिक्षा के लिए उन्हें यहां भेजा गया है। आयोग अब यह भी जांच करेगा कि बच्चों के रहने और पढ़ाई की व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप हैं या नहीं।












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