उत्तराखंड में मानसून का असर: भूस्खलन से 184 सड़कें बंद, कई जिलों में येलो अलर्ट, राहत कार्य तेज

उत्तराखंड में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। लगातार हो रही बारिश ने जहां मैदानी इलाकों को गर्मी और उमस से राहत दी है, वहीं पर्वतीय जिलों में जनजीवन प्रभावित होने लगा है। भारी बारिश के कारण कई स्थानों पर भूस्खलन और मलबा आने से राज्यभर में 184 सड़कें बंद हो गई हैं। इससे कई गांवों और कस्बों का संपर्क टूट गया है और लोगों की आवाजाही में परेशानी बढ़ गई है।

मौसम विभाग ने देहरादून समेत कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। प्रशासन, लोक निर्माण विभाग (PWD) और आपदा प्रबंधन विभाग हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। प्रभावित मार्गों को जल्द से जल्द खोलने के लिए युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है।

चमोली में सबसे अधिक असर, कई जिलों में सड़कें बाधित

मंगलवार को हुई तेज बारिश का सबसे अधिक प्रभाव चमोली जिले में देखने को मिला, जहां सबसे ज्यादा सड़कें बंद हुई हैं। इसके अलावा उत्तरकाशी, टिहरी और पौड़ी जिलों में भी कई मार्गों पर यातायात बाधित है।

लोक निर्माण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में कुल 184 सड़कें बंद हैं। इनमें 71 सड़कें लोक निर्माण विभाग (PWD) और 113 सड़कें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत आती हैं। कई राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी बारिश और मलबा आने के कारण आवाजाही प्रभावित हुई है।

685 मशीनों के जरिए सड़कें खोलने का अभियान

लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियन्ता राजेश चन्द्र शर्मा ने बताया कि बंद सड़कों को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए पूरे प्रदेश में 685 मशीनें और आवश्यक संसाधन तैनात किए गए हैं। विभाग की टीमें लगातार मलबा हटाने और यातायात सामान्य करने में जुटी हुई हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि बारिश के बावजूद प्रदेश के सभी पुल पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनकी नियमित निगरानी की जा रही है।

चारधाम यात्रा मार्गों पर विशेष निगरानी

चारधाम यात्रा को देखते हुए विभाग ने यात्रा मार्गों और संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों पर विशेष निगरानी बढ़ा दी है। सिरोबगड़ जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि पहले किए गए सुरक्षा और ट्रीटमेंट कार्यों का सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है। वहीं वैकल्पिक बाईपास के निर्माण का कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति में यातायात प्रभावित न हो।

आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह अलर्ट

राज्य का आपदा प्रबंधन विभाग भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि सभी जिलों में तहसील स्तर तक प्रशासनिक टीमें सक्रिय कर दी गई हैं।

जहां भी सड़क बंद होने, भूस्खलन या अन्य आपदा की सूचना मिल रही है, वहां तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किए जा रहे हैं। आवश्यकता पड़ने पर एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी मौके पर भेजी जा रही हैं। मसूरी सहित अन्य संवेदनशील पर्यटन स्थलों की स्थिति पर भी विशेष नजर रखी जा रही है।

इन जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट

मौसम विभाग ने देहरादून, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें, मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें और यात्रा से पहले सड़क मार्गों की स्थिति की जानकारी अवश्य लें।

मानसून के इस दौर में सरकार, लोक निर्माण विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग मिलकर बंद सड़कों को जल्द खोलने और जनजीवन को सामान्य बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।

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