चमोली: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को गोपेश्वर स्थित पुलिस मैदान में आयोजित ‘सेवा, सुशासन एवं समर्पण’ सेवा पखवाड़ा के तहत ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम में कहा कि सरकार का सबसे बड़ा धर्म जनता की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगवाना नहीं, बल्कि प्रशासन को स्वयं उनके द्वार तक पहुंचाकर समस्याओं का त्वरित समाधान करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान शासन और जनता के बीच की दूरी को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अभियान के पहले चरण में प्रदेशभर में छह लाख से अधिक लोगों ने भागीदारी की और 60 हजार से अधिक शिकायतों का मौके पर ही समाधान किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार सेवा, सुशासन और समर्पण के पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर जनता के बीच पहुंचकर अपनी जवाबदेही निभा रही है। उनका कहना था कि सरकार का लक्ष्य अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना और प्रशासन को अधिक जवाबदेह बनाना है।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सीमांत गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का “21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा” का संकल्प अब विकास परियोजनाओं के रूप में धरातल पर दिखाई देने लगा है। जी-20 बैठकों की मेजबानी, राष्ट्रीय खेलों का सफल आयोजन और शीतकालीन यात्रा की शुरुआत को उन्होंने राज्य की महत्वपूर्ण उपलब्धियां बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में 3.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश समझौते हुए हैं, जिनमें एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है। उन्होंने बताया कि राज्य में जीएसटी संग्रह, प्रति व्यक्ति आय, स्टार्टअप और पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही रिवर्स पलायन की सकारात्मक तस्वीर सामने आई है, जहां युवा अपने गांव लौटकर स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी), नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस जैसी पहलें सुशासन की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। इसके अलावा अब तक 34 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं।
चमोली जिले के विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में जिले में हजारों करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया है। बदरीनाथ धाम, माणा और नीति क्षेत्र में मास्टर प्लान के तहत तेजी से विकास कार्य चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि 155 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 63 विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया है, जिससे जिले के विकास को नई गति मिलेगी। वहीं ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना भविष्य में पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चमोली में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। जिले की 42 हजार से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ चुकी हैं, जबकि 25 हजार से अधिक महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं। इसके अलावा किसान सम्मान निधि के तहत 48 हजार से अधिक किसानों को 196 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की गई है। दीनदयाल होमस्टे योजना के अंतर्गत जिले में 872 नए होमस्टे स्थापित होने से स्थानीय युवाओं और परिवारों को रोजगार के नए अवसर मिले हैं।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बद्रीनाथ मंदिर चोरी प्रकरण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर है और सरकार इस पर किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होने देगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि दोषियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने प्रदेशवासियों से सेवा पखवाड़ा के तहत आयोजित शिविरों में अधिक से अधिक भागीदारी कर सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की भी अपील की।
















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