गैर इरादतन हत्या के एक मामले में न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 7 वर्ष के कारावास और ₹10,000 के अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला उत्कृष्ट विवेचना और प्रभावी पैरवी के आधार पर सुनाया गया।
मामले का विवरण
यह मामला 20 फरवरी 2018 का है, जब कोतवाली डीडीहाट क्षेत्र के अंतर्गत उद्यान विभाग सानदेव में कार्यरत उमेश सिंह की गैर इरादतन हत्या का मामला सामने आया था। इस घटना के बाद मृतक के पुत्र की तहरीर पर आरोपी चन्द्र प्रकाश आर्या, निवासी कोटसाली, देघाट (अल्मोड़ा) के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 304 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
जांच और पैरवी
कोतवाली डीडीहाट पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत और सटीक विवेचना की। जांच पूरी होने के बाद 18 मई 2018 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया।
मामले की प्रभावी पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता महेन्द्र आर्या द्वारा की गई, जिससे अभियोजन पक्ष को मजबूती मिली।
न्यायालय का फैसला
सुनवाई के बाद सत्र न्यायाधीश, पिथौरागढ़ श्री धनंजय चतुर्वेदी ने आरोपी चन्द्र प्रकाश आर्या को दोषी ठहराते हुए 7 वर्ष के कठोर कारावास और ₹10,000 के जुर्माने की सजा सुनाई।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जुर्माना अदा न करने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त 2 माह का कारावास भुगतना होगा।
यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और मजबूत पैरवी का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।















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