देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा में नारी शक्ति बंधन अधिनियम को लेकर बुलाए गए विशेष सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। केंद्र स्तर पर बिल पारित न होने के मुद्दे पर भाजपा लगातार विपक्ष को घेर रही है। इसी कड़ी में धामी सरकार ने विधानसभा में विशेष सत्र बुलाकर विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिस पर सदन में विस्तार से चर्चा हुई।
विपक्ष ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वह महिलाओं को आरक्षण देने के पक्ष में है और इसका विरोध नहीं करता। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वर्ष 2023 में लाए गए प्रावधानों के अनुसार ही महिलाओं को आरक्षण मिलना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी मांग रखी कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन के बाद 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए। कांग्रेस का कहना है कि इस प्रक्रिया में वह पूरी तरह सहयोग करेगी।
वहीं, भाजपा विधायकों ने विपक्ष के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर गंभीर नहीं है। उनका आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार लगातार महिलाओं को मजबूत बनाने के लिए काम कर रही है, लेकिन विपक्ष राजनीतिक कारणों से इसका विरोध कर रहा है।
सदन में हुई बहस से यह स्पष्ट हो गया है कि नारी शक्ति बंधन अधिनियम आने वाले दिनों में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना रहेगा।
















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