मिशन 2027: सामान्य सीटों पर भी SC उम्मीदवार उतार सकती है भाजपा, 15 सीटों पर नया सामाजिक समीकरण तैयार

मिशन 2027: भाजपा का बड़ा सामाजिक दांव, 15 सीटों पर SC प्रतिनिधित्व की तैयारी!

देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति पर मंथन तेज कर दिया है। पार्टी अब केवल आरक्षित सीटों तक सीमित न रहकर सामान्य सीटों पर भी अनुसूचित जाति (SC) समुदाय को प्रतिनिधित्व देने की संभावनाओं पर विचार कर रही है।

सूत्रों के अनुसार भाजपा आगामी चुनाव में 13 अनुसूचित जाति आरक्षित सीटों के अलावा दो सामान्य विधानसभा सीटों पर भी SC प्रत्याशी उतार सकती है। यदि यह रणनीति लागू होती है तो कुल 15 सीटों पर अनुसूचित जाति समुदाय को प्रतिनिधित्व मिल सकता है।

हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद के बाद संगठन सतर्क

भाजपा संगठन हल्द्वानी में सामने आए शुद्धिकरण विवाद को गंभीरता से ले रहा है। हाल ही में आयोजित पार्टी की कोर कमेटी बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा इस विषय पर चर्चा किए जाने के बाद संगठनात्मक स्तर पर सामाजिक संतुलन और अनुसूचित जाति वर्ग में विश्वास मजबूत करने पर विशेष फोकस बढ़ा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा इस रणनीति के जरिए अनुसूचित जाति समाज में अपनी स्वीकार्यता और राजनीतिक आधार को और मजबूत करना चाहती है।

2017 से 2022 तक घटा भाजपा का प्रदर्शन

उत्तराखंड में कुल 13 विधानसभा सीटें अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं।

2017 विधानसभा चुनाव

  • भाजपा: 11 सीटें
  • कांग्रेस: 2 सीटें

2022 विधानसभा चुनाव

  • भाजपा: 9 सीटें
  • कांग्रेस: 4 सीटें

2022 के चुनाव में भाजपा को अनुसूचित जाति आरक्षित सीटों पर नुकसान उठाना पड़ा। विशेष रूप से हरिद्वार जिले की तीनों आरक्षित सीटें कांग्रेस के खाते में गईं, जबकि ऊधमसिंह नगर की बाजपुर सीट भी कांग्रेस ने जीत ली थी।

18.76 प्रतिशत है SC आबादी

2011 की जनगणना के अनुसार उत्तराखंड की कुल आबादी 1,00,86,292 थी, जिसमें अनुसूचित जाति समुदाय की आबादी 18,92,516 (18.76 प्रतिशत) दर्ज की गई थी। यही कारण है कि प्रदेश की राजनीति में SC वर्ग निर्णायक भूमिका निभाता है।

सामाजिक इंजीनियरिंग के जरिए वोट बैंक विस्तार की कोशिश

भाजपा की यह संभावित रणनीति केवल चुनावी गणित तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे सामाजिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने और संगठन के सामाजिक आधार को व्यापक बनाने की कवायद के रूप में भी देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि विभिन्न सामाजिक वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देकर 2027 के चुनाव में मजबूत स्थिति बनाई जा सकती है।

हालांकि अभी तक पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन संगठन के भीतर इस विषय पर गंभीर मंथन जारी बताया जा रहा है।

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