मसूरी में याद किए गए प्रसिद्ध प्रकृतिविद् जिम कॉर्बेट, इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने साझा किए अनसुने ऐतिहासिक प्रसंग

मसूरी: पहाड़ की गोद में बसी खूबसूरत पर्यटन नगरी मसूरी में विश्व प्रसिद्ध शिकारी, पर्यावरणविद और कालजयी लेखक एडवर्ड जेम्स ‘जिम’ कॉर्बेट (Jim Corbett) की जयंती के अवसर पर एक विशेष श्रद्धांजलि एवं स्मरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान शहर के गणमान्य नागरिकों, प्रबुद्धवर्ग और इतिहासकारों ने जिम कॉर्बेट की समृद्ध विरासत और प्रकृति के प्रति उनके अभूतपूर्व समर्पण को श्रद्धापूर्वक याद किया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, प्रसिद्ध इतिहासकार गोपाल भारद्वाज और वरिष्ठ पत्रकार बिजेंद्र पुंडीर ने उपस्थित लोगों के साथ जिम कॉर्बेट के जीवन तथा मसूरी शहर से जुड़ी उनकी ऐतिहासिक स्मृतियों को साझा किया।

आदमखोरों के शिकारी ही नहीं, संवेदनशील फोटोग्राफर भी थे जिम कॉर्बेट

इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने चर्चा के दौरान बताया कि आम जनता जिम कॉर्बेट को केवल आदमखोर बाघों और तेंदुओं के शिकारी के रूप में जानती है, जबकि उनका व्यक्तित्व इससे कहीं अधिक विस्तृत था। वे एक संवेदनशील प्रकृति प्रेमी, बेहतरीन ट्रैकर और अपने समय के एक उत्कृष्ट वन्यजीव फोटोग्राफर (Wildlife Photographer) भी थे।

गोपाल भारद्वाज (इतिहासकार):

“जिम कॉर्बेट ने उस दौर में अपने कैमरे में वन्यजीवों, हिमालयी सुंदरता और तत्कालीन भारत के जनजीवन से जुड़े कई दुर्लभ दृश्यों को कैद किया था। उनकी कैमरे से ली गई तस्वीरें आज भी हमारी ऐतिहासिक और प्राकृतिक विरासत का अनमोल हिस्सा हैं।”

मसूरी से रहा है जिम कॉर्बेट का गहरा नाता

कार्यक्रम में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि मसूरी केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि जिम कॉर्बेट की जीवन-यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव भी रहा है। उन्होंने अपने जीवन का एक यादगार समय पहाड़ों की रानी मसूरी में बिताया था। शहरवासियों के लिए यह हमेशा से ही गौरव का विषय रहा है कि इतनी महान हस्ती की यादें मसूरी की वादियों से जुड़ी हुई हैं।

साहित्यिक योगदान और वन्यजीव संरक्षण की प्रेरणा

समारोह के दौरान वक्ताओं ने जिम कॉर्बेट की लिखी प्रसिद्ध पुस्तकों—जैसे “मैन-ईटर्स ऑफ़ कुमाऊँ” (Man-Eaters of Kumaon)—और उनके साहित्यिक योगदान का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कैसे एक शिकारी बाद में भारत के सबसे बड़े वन्यजीव संरक्षकों में से एक बना और एशिया के पहले राष्ट्रीय उद्यान (जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क) की स्थापना में अपनी निर्णायक भूमिका निभाई।

कार्यक्रम का समापन प्रकृति संरक्षण के संकल्प के साथ हुआ। उपस्थित लोगों ने जिम कॉर्बेट के दिखाए मार्ग पर चलने और पर्यावरण व वन्यजीवों के संवर्धन का आह्वान किया।

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