देहरादून: लंबे समय से बंदरों के आतंक से परेशान दूनवासियों के लिए राहत भरी खबर है। देहरादून नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के सकारात्मक परिणाम अब साफ तौर पर दिखाई देने लगे हैं। नगर निगम के वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. वी.के. अग्रवाल के अनुसार, शहर में बंदरों से जुड़ी शिकायतों में लगभग 90 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। इससे उन इलाकों के लोगों को बड़ी राहत मिली है, जहां बंदरों का आतंक लंबे समय से चिंता का विषय बना हुआ था।
मार्च 2026 से चल रहा है विशेष अभियान
डॉ. वी.के. अग्रवाल ने बताया कि नगर निगम ने मार्च 2026 से बंदरों को पकड़ने का विशेष अभियान शुरू किया था। इस अभियान के तहत प्रशिक्षित टीम हर महीने कम से कम दो बार, जबकि आवश्यकता पड़ने पर तीन बार प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करती है।
टीम लगातार तीन से चार दिनों तक संबंधित इलाकों में अभियान चलाकर बंदरों को सुरक्षित तरीके से पकड़ती है। इसके बाद उन्हें शहर से दूर नजदीकी जंगलों में छोड़ा जाता है, ताकि आबादी वाले क्षेत्रों में उनका दोबारा प्रवेश कम हो सके।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा मिला फायदा
नगर निगम के अनुसार, रेलवे स्टेशन, हनुमान चौक और खुरबुड़ा जैसे क्षेत्रों में अभियान का सबसे अधिक असर देखने को मिला है। इन इलाकों में पहले बंदरों के कारण लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर हो गई है।
शिकायतों में 90 प्रतिशत तक आई कमी
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि नगर निगम को बंदरों से संबंधित शिकायतों में करीब 90 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इतना ही नहीं, पार्षदों की ओर से भी अब बंदरों की समस्या को लेकर बहुत कम शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। उन्होंने इसे नगर निगम के अभियान की सफलता का महत्वपूर्ण संकेत बताया।
एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाने पर बढ़ सकती हैं अस्थायी शिकायतें
नगर निगम का कहना है कि कई बार बंदर एक इलाके से दूसरे इलाके में चले जाते हैं, जिससे नए क्षेत्रों में कुछ समय के लिए शिकायतें बढ़ सकती हैं। हालांकि, ऐसी स्थिति में भी नगर निगम की टीम तुरंत मौके पर पहुंचकर अभियान चलाती है और समस्या का समाधान सुनिश्चित करती है।
नगर निगम का अभियान लगातार रहेगा जारी
नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि शहर में बंदरों की बढ़ती समस्या पर स्थायी नियंत्रण बनाए रखने के लिए यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि जरूरत के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर नियमित कार्रवाई की जाएगी, ताकि नागरिकों को सुरक्षित और परेशानी मुक्त वातावरण मिल सके.














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