उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी और राष्ट्रीय महत्व की लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर राज्य सरकार अब मिशन मोड में काम करती नजर आ रही है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने गुरुवार को परियोजना स्थल का दौरा कर निर्माण कार्यों की प्रगति का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड जल विद्युत निगम (यूजेवीएनएल) और निर्माण एजेंसी एलएंडटी (L&T) के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि परियोजना का निर्माण कार्य वर्ष 2031 तक हर हाल में पूरा किया जाए। उन्होंने लक्ष्य को समय पर हासिल करने के लिए मैनपावर और मशीनरी बढ़ाने के साथ गुणवत्ता और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव ने परियोजना के विभिन्न निर्माण स्थलों का जायजा लिया और अधिकारियों से कार्यों की मौजूदा स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि कई राज्यों के लिए महत्वपूर्ण है। यह परियोजना भविष्य में जलविद्युत उत्पादन, सिंचाई और पेयजल आपूर्ति के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाएगी। उन्होंने सभी संबंधित एजेंसियों को अगले दो से तीन दिनों के भीतर विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर 2031 तक निर्माण पूरा करने का रोडमैप प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने निर्माण कार्यों में तेजी लाने के लिए अतिरिक्त मशीनरी और तकनीकी संसाधनों की तैनाती पर बल दिया। उन्होंने कहा कि परियोजना की नियमित निगरानी के लिए दैनिक, पाक्षिक और मासिक समीक्षा अनिवार्य रूप से की जाए। इसके साथ ही सभी आवश्यक तकनीकी परीक्षण समय पर पूरे किए जाएं और निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता न किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना का हर चरण निर्धारित मानकों के अनुरूप और तय समयसीमा में पूरा हो।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित परिवारों के मुआवजे का वितरण शीघ्र पूरा करने और उनसे लगातार संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परियोजना से जुड़े प्रशासनिक और सामाजिक मुद्दों का समयबद्ध समाधान आवश्यक है, ताकि निर्माण कार्य किसी भी कारण से प्रभावित न हो और परियोजना बिना रुकावट आगे बढ़ सके।
गौरतलब है कि पहले लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना को दिसंबर 2034 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन अब राज्य सरकार ने इसे तीन वर्ष पहले यानी 2031 तक पूरा करने की दिशा में तेजी लाने का निर्णय लिया है। परियोजना पूरी होने के बाद उत्तराखंड समेत कई राज्यों को जलविद्युत उत्पादन, सिंचाई और पेयजल उपलब्धता के क्षेत्र में दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना क्षेत्र के विकास और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
















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