देहरादून: उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, लोककला और गढ़वाली सिनेमा के लिए गर्व का क्षण सामने आया है। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में गढ़वाली फीचर फिल्म ‘ढोली’ को राष्ट्रीय सम्मान मिलने से पूरे प्रदेश में खुशी का माहौल है। यह पहली बार है जब उत्तराखंडी बोली में बनी किसी पूर्ण लंबाई की फीचर फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
यह उपलब्धि केवल एक फिल्म की सफलता नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और क्षेत्रीय सिनेमा को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाला ऐतिहासिक पड़ाव भी है।
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में मिली बड़ी उपलब्धि
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा के साथ ही उत्तराखंड के फिल्म जगत में उत्साह की लहर दौड़ गई। गढ़वाली फीचर फिल्म ‘ढोली’ को सर्वश्रेष्ठ उत्तराखंडी फीचर फिल्म का राष्ट्रीय सम्मान दिया गया है। इस पुरस्कार के तहत निर्माता और निर्देशक को रजत कमल के साथ दो लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी प्रदान की जाएगी।
फिल्म का निर्देशन राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक दिनेश पी. भोंसले ने किया है। इससे पहले भी वे अपनी फिल्मों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान हासिल कर चुके हैं। ‘ढोली’ प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. नंदकिशोर हटवाल की चर्चित कहानी ‘जमनदास ढोली’ पर आधारित है।
लोकसंस्कृति और संघर्ष की मार्मिक कहानी
‘ढोली’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और सामाजिक इतिहास का जीवंत चित्रण है। फिल्म ढोली समुदाय के जीवन, संघर्ष और योगदान को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती है।
सदियों से यह समुदाय देव संस्कृति, धार्मिक अनुष्ठानों और लोक परंपराओं को ढोल-दमाऊं की थाप के जरिए जीवंत बनाए हुए है। समाज की खुशियों और आस्था का अभिन्न हिस्सा रहने के बावजूद इस समुदाय को सामाजिक उपेक्षा का भी सामना करना पड़ा। फिल्म इन्हीं भावनाओं, संघर्षों और मानवीय रिश्तों को प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर उतारती है।
यही वजह है कि इसकी कहानी दर्शकों के साथ-साथ राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की जूरी को भी गहराई से प्रभावित करने में सफल रही।
उत्तराखंड फिल्म उद्योग के लिए नई उम्मीद
उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद ने भी इस उपलब्धि को राज्य के फिल्म उद्योग और नई फिल्म नीति के लिए सकारात्मक संकेत बताया है।
परिषद के नोडल अधिकारी के.एस. चौहान के अनुसार, यह सम्मान सिर्फ एक फिल्म की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंडी सिनेमा आंदोलन की सफलता है। इससे क्षेत्रीय भाषाओं, स्थानीय कलाकारों और फिल्म निर्माताओं को राष्ट्रीय स्तर पर नए अवसर मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की नई फिल्म नीति के चलते उत्तराखंड तेजी से एक प्रमुख फिल्म डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है और भविष्य में यहां क्षेत्रीय तथा राष्ट्रीय स्तर की फिल्मों के निर्माण को और बढ़ावा मिलेगा।
उत्तराखंड के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि
गढ़वाली फिल्म ‘ढोली’ को मिला राष्ट्रीय सम्मान उत्तराखंड के क्षेत्रीय सिनेमा के लिए एक नई शुरुआत माना जा रहा है। यह सफलता आने वाले समय में स्थानीय कलाकारों, लेखकों और फिल्म निर्माताओं को नई प्रेरणा देगी और उत्तराखंड की लोकसंस्कृति को देश-दुनिया तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगी।














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