देहरादून: जहां एक ओर सेकंड सैटरडे के कारण अधिकांश सरकारी दफ्तरों में अवकाश था, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा में रहे। सहसपुर में आयोजित मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जनसभा एवं जनसेवा शिविर के दौरान सामने आई एक छोटी-सी मांग का जिस तेजी से समाधान हुआ, उसने प्रशासनिक सक्रियता की मिसाल पेश की।
जनसेवा शिविर के दौरान एक महिला ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने अपनी आजीविका के लिए सिलाई मशीन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। कार्यक्रम के दौरान यह मांग अधिकारियों तक पहुंची और कुछ ही समय में महिला के घर सिलाई मशीन पहुंचा दी गई। यह घटना प्रशासन की त्वरित कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा का विषय बन गई।
इस पूरे घटनाक्रम में मुख्यमंत्री कार्यालय के अपर सचिव, सूचना विभाग के महानिदेशक एवं एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंसीधर तिवारी की सक्रिय भूमिका की चर्चा रही। बताया जाता है कि वे कार्यक्रम के दौरान व्यवस्थाओं की निगरानी के साथ-साथ जनसमस्याओं के समाधान पर भी लगातार नजर बनाए हुए थे। मंच प्रबंधन से लेकर जनप्रतिनिधियों के समन्वय, मीडिया संवाद और आम लोगों की शिकायतों के निस्तारण तक वे हर स्तर पर सक्रिय दिखाई दिए।
बंसीधर तिवारी की कार्यशैली को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में पहले भी चर्चा होती रही है। कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में उन्हें स्वयं व्यवस्थाएं संभालते, अतिथियों के बैठने की व्यवस्था करते और मौके पर ही समस्याओं के समाधान के निर्देश देते देखा गया है। यही वजह है कि उनकी पहचान केवल एक वरिष्ठ अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि परिणाम आधारित प्रशासनिक शैली अपनाने वाले अधिकारी के रूप में भी बन रही है।
उत्तराखंड की नौकरशाही में जहां अक्सर अधिकारियों का मूल्यांकन उनकी जिम्मेदारियों और पदों के आधार पर होता है, वहीं कुछ अधिकारी अपनी कार्यशैली और व्यवहार के कारण अलग पहचान बना लेते हैं। बंसीधर तिवारी का नाम भी ऐसे ही अधिकारियों में लिया जा रहा है। हालांकि, “तिवारी जी के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता” जैसी बातें लोगों की व्यक्तिगत राय और अनुभव हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती। लेकिन सहसपुर की यह घटना निश्चित रूप से प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया और जनसेवा के एक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है।














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