कॉर्बेट लैंडस्केप का मशहूर ‘भोला’ बाघ घायल, देर रात सफल रेस्क्यू; ढेला रेस्क्यू सेंटर में शुरू हुआ इलाज

रामनगर से वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। कॉर्बेट लैंडस्केप के प्रसिद्ध नर बाघ ‘भोला’ को गंभीर रूप से घायल और कमजोर हालत में पाए जाने के बाद वन विभाग ने गुरुवार देर रात सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया। फिलहाल उसे ढेला रेस्क्यू सेंटर में विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है, जहां उसका इलाज जारी है।

वन विभाग के अनुसार, भोला बाघ पिछले कुछ समय से घायल अवस्था में जंगल में घूम रहा था। उसकी स्थिति लगातार बिगड़ रही थी और वह ठीक से शिकार भी नहीं कर पा रहा था। प्रारंभिक जांच में उसके एक पैर में गहरा घाव और कई स्थानों पर मांस उधड़ा हुआ मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चोट किसी दूसरे नर बाघ के साथ क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान लगी हो सकती है।

लगातार निगरानी के बाद बनाई गई रेस्क्यू योजना

तराई पश्चिमी वन प्रभाग के डीएफओ पी.सी. आर्या ने बताया कि फाटो जोन में गश्त के दौरान वनकर्मियों ने भोला को लंगड़ाते हुए देखा था। सूचना मिलने के बाद वन विभाग ने उसकी लगातार मॉनिटरिंग शुरू की। निगरानी के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि बाघ गंभीर रूप से घायल होने के साथ-साथ काफी कमजोर भी हो चुका है।

स्थिति को देखते हुए उच्च अधिकारियों की अनुमति के बाद विशेषज्ञों की एक विशेष रेस्क्यू टीम गठित की गई। गुरुवार रात करीब 10 बजे भोला फाटो जोन में दिखाई दिया, जिसके बाद टीम ने सुरक्षित तरीके से उसे ट्रेंकुलाइज कर सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर ढेला रेस्क्यू सेंटर पहुंचाया।

रेस्क्यू में सबसे बड़ी चुनौती बना बार-बार क्षेत्र बदलना

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ वन्यजीव पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दुष्यंत शर्मा ने बताया कि घायल होने के बावजूद भोला लगातार अपना क्षेत्र बदल रहा था और ढेला के जंगलों की ओर चला जाता था। इसी वजह से उसका रेस्क्यू अभियान काफी चुनौतीपूर्ण हो गया था।

उन्होंने बताया कि चिकित्सकीय जांच में बाघ के एक पैर में गंभीर घाव मिला है। चोट इतनी गहरी थी कि वह शिकार करने में असमर्थ हो गया था, जिसके कारण उसकी शारीरिक स्थिति भी लगातार कमजोर होती चली गई।

स्वस्थ होने के बाद जंगल में छोड़ा जाएगा भोला

वन विभाग ने बताया कि फिलहाल भोला को ढेला रेस्क्यू सेंटर में विशेष निगरानी में रखा गया है। विशेषज्ञ डॉक्टर उसकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उपचार पूरा होने और पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उसे दोबारा उसके प्राकृतिक आवास यानी जंगल में छोड़ दिया जाएगा।

वन विभाग का कहना है कि बाघ की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और उसकी रिकवरी के लिए हर संभव चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

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