मसूरी-देहरादून मार्ग पर निर्माणाधीन वैली ब्रिज को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उपेंद्र थापली ने मसूरी में आयोजित प्रेस वार्ता में पुल की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
उपेंद्र थापली ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों के उस दावे को खारिज किया, जिसमें पुल को पूरी तरह सुरक्षित बताया गया है। उन्होंने कहा कि जब पुल सुरक्षित है, तो भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक क्यों लगाई गई है। साथ ही, पुल पर लगातार चल रहे मरम्मत कार्य भी कई सवाल खड़े करते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुल के आसपास से मिट्टी का रिसाव हो रहा है, जो निर्माण में खामियों की ओर इशारा करता है। थापली ने चेतावनी दी कि इस तरह की स्थिति भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस वैली ब्रिज की गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों ने स्थानीय लोगों की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। इसके अलावा, उन्होंने मसूरी विधानसभा क्षेत्र की सड़कों की बदहाल स्थिति का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि कई सड़कों का काम लंबे समय से अधूरा पड़ा है और संबंधित विभाग इस ओर गंभीर नहीं दिख रहा।
पार्किंग व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने प्रशासन को घेरा। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय ने मसूरी में अवैध पार्किंग को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए 8 सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट मांगी है। ऐसे में नगर पालिका परिषद को जल्द नए पार्किंग स्थलों की पहचान करनी चाहिए, ताकि पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिल सके।
मसूरी, जो देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है, वहां बुनियादी ढांचे की मजबूती बेहद जरूरी है। वैली ब्रिज को लेकर उठ रहे ये सवाल प्रशासन और सरकार के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं।
















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