देहरादून: उत्तराखंड में मधुमक्खी पालन अब कृषि के साथ-साथ आय बढ़ाने का एक प्रभावी विकल्प बनता जा रहा है। राज्य के कृषि मंत्री Ganesh Joshi के अनुसार, प्रदेश में 10 हजार से अधिक किसान व्यावसायिक स्तर पर मधुमक्खी पालन से जुड़े हुए हैं, जिससे हर साल करीब 3300 टन शहद का उत्पादन हो रहा है।
मंत्री ने बताया कि कई किसान छोटे स्तर पर भी इस व्यवसाय को अपनाकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। राज्य में मुख्य रूप से एपिस इंडिका और एपिस मेलिफेरा प्रजातियों की मधुमक्खियों से शहद उत्पादन किया जा रहा है, जो उच्च गुणवत्ता के लिए जानी जाती हैं।
सरकार द्वारा मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसी क्रम में हर जिले में एक “मधुग्राम” स्थापित किया जा रहा है, जबकि चंपावत और देहरादून में दो-दो मधुग्राम विकसित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और विपणन की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
कृषि मंत्री ने कहा कि मधुमक्खी पालन उन किसानों के लिए खास तौर पर फायदेमंद है, जिनके पास कृषि योग्य भूमि कम है। कम निवेश में शुरू होने वाला यह व्यवसाय ग्रामीण युवाओं और स्वरोजगार की दिशा में भी अहम भूमिका निभा रहा है।
सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक किसानों को इस क्षेत्र से जोड़ा जाए, ताकि उनकी आय दोगुनी करने के साथ-साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सके।














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