मानसून की संभावित देरी से निपटने को तैयार उत्तराखंड सरकार, किसानों के लिए बनाई विशेष रणनीति: गणेश जोशी

देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने खरीफ सीजन 2026 के दौरान मानसून में संभावित देरी या वर्षा की कमी से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए व्यापक तैयारी कर ली है। प्रदेश के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि किसानों के हितों की सुरक्षा और कृषि उत्पादन को प्रभावित होने से बचाने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क और तैयार है।

कृषि मंत्री गणेश जोशी ने यह बात केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों की वर्चुअल बैठक में कही। बैठक में मानसून की संभावित देरी और कम वर्षा की स्थिति में अपनाए जाने वाले आकस्मिक उपायों (कंटिन्जेंसी प्लान) की समीक्षा की गई।

सभी जनपदों के लिए तैयार की गई कृषि आकस्मिकता योजना

गणेश जोशी ने बताया कि उत्तराखंड कृषि विभाग ने कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञ संस्थानों के सहयोग से सभी जिलों के लिए विस्तृत कृषि आकस्मिकता योजना तैयार कर ली है। पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग रणनीतियां बनाई गई हैं, ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

उन्होंने कहा कि यदि मानसून में देरी होती है तो किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली और सूखा सहनशील फसलों के गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध कराए जाएंगे।

पारंपरिक और वैकल्पिक फसलों को मिलेगा बढ़ावा

कृषि मंत्री ने बताया कि पर्वतीय क्षेत्रों में मंडुवा, झंगोरा, गहत, भट्ट, राजमा और तिल जैसी पारंपरिक फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं मैदानी क्षेत्रों में धान के विकल्प के रूप में मक्का, मूंग, उड़द, अरहर और चारा फसलों की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस रणनीति का उद्देश्य कम वर्षा की स्थिति में भी किसानों की आय और उत्पादन को सुरक्षित रखना है।

जल संरक्षण और सूक्ष्म सिंचाई पर विशेष जोर

गणेश जोशी ने कहा कि जल संरक्षण और नमी प्रबंधन राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं। इसके लिए खेत तालाब, चाल-खाल, कंटूर बंडिंग, सामुदायिक जल स्रोतों के संरक्षण और सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

इसके साथ ही किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई तकनीक अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे कम पानी में अधिक उत्पादन सुनिश्चित किया जा सके।

खेत बचाओ अभियान से किसानों को दी जा रही जानकारी

उन्होंने बताया कि कृषि विभाग के अधिकारी जिला और विकासखंड स्तर पर मौसम तथा कृषि गतिविधियों की लगातार निगरानी कर रहे हैं। प्रदेशभर में संचालित “खेत बचाओ अभियान” के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक खेती, मौसम आधारित कृषि सलाह, फसल प्रबंधन, वैकल्पिक फसल प्रणाली और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जानकारी दी जा रही है।

किसानों से फसल बीमा कराने की अपील

कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की कि वे कृषि विभाग द्वारा जारी वैज्ञानिक सलाह का पालन करें और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसलों का बीमा अवश्य कराएं।

उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की जानकारी या सहायता के लिए किसान अपने नजदीकी कृषि कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं या कृषि विभाग के टोल फ्री नंबर 18001801551 पर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

गणेश जोशी ने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों, कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन और किसानों की सक्रिय भागीदारी से मानसून से जुड़ी संभावित चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया जाएगा और किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।

बैठक में कृषि निदेशक दिनेश कुमार, उद्यान निदेशक डॉ. आर.के. सिंह सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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