चारधाम यात्रा के तहत बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हो गई है। इसी क्रम में नरेंद्रनगर स्थित राजमहल में भगवान बद्री विशाल के अभिषेक हेतु तिलों के तेल को पिरोने की सदियों पुरानी परंपरा विधि-विधान के साथ संपन्न की गई।
इस धार्मिक अनुष्ठान का नेतृत्व टिहरी की सांसद और महारानी माला राज्य लक्ष्मी शाह ने किया। इस दौरान नगर की सुहागिन महिलाओं ने व्रत रखकर पीले वस्त्र धारण किए और पारंपरिक तरीके से मूसल, ओखली और सिलबट्टे की मदद से तिलों से तेल निकाला।
तैयार किए गए तेल में विशेष जड़ी-बूटियां मिलाकर उसे शुद्ध किया गया और फिर चांदी के कलश में सुरक्षित रखा गया। इसके बाद डिमरी केंद्रीय धार्मिक पंचायत के पुजारियों और राजपरिवार द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना कर तेल कलश (गाडू घड़ी) को भोग लगाया गया।
शाम को यह पवित्र तेल कलश भव्य शोभायात्रा के साथ नरेंद्रनगर राजमहल से बद्रीनाथ धाम के लिए रवाना किया जाएगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और पूरे वातावरण में भक्ति और आस्था का माहौल देखने को मिला।
महारानी माला राज्य लक्ष्मी शाह ने देश-प्रदेश की सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए श्रद्धालुओं से बद्रीनाथ धाम पहुंचकर भगवान के दर्शन करने का आह्वान किया।
विशेष बात यह रही कि कार्यक्रम के दौरान सुबह हल्की बूंदाबांदी हो रही थी, लेकिन जैसे ही विधिवत पूजा शुरू हुई, मौसम साफ हो गया। श्रद्धालुओं ने इसे भगवान बद्री विशाल की कृपा माना।
गौरतलब है कि 23 अप्रैल सुबह 6:15 बजे बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए जाएंगे।














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