सचिन कुमार
उत्तराखंड में आगामी चारधाम यात्रा को लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते गैस संकट और संभावित आपूर्ति बाधाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर ‘Plan-B’ तैयार कर लिया है।
बढ़ती मांग के बीच ईंधन संकट की आशंका
चारधाम यात्रा के दौरान राज्य में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस दौरान होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में गैस सिलेंडरों की खपत कई गुना बढ़ जाती है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए सरकार को आशंका है कि आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
समाधान के तौर पर जलौनी लकड़ी
इसी स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने चारधाम यात्रा मार्गों पर जलौनी लकड़ी उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। उत्तराखंड वन विकास निगम के जरिए प्रमुख पड़ावों और संवेदनशील क्षेत्रों में अस्थायी डिपो स्थापित किए जाने पर काम चल रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत ईंधन उपलब्ध कराया जा सके।
वन क्षेत्रों से होगी आपूर्ति सुनिश्चित
सरकार होप्लो कीट से प्रभावित जंगलों में वैज्ञानिक तरीके से कटान कर जलौनी लकड़ी की उपलब्धता बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। इससे पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हुए संसाधनों का उपयोग किया जाएगा।
पश्चिम एशिया तनाव का असर
सरकार की चिंता का एक बड़ा कारण पश्चिम एशिया में जारी तनाव है, जिससे गैस आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसे में राज्य सरकार हर स्थिति के लिए तैयार रहना चाहती है, ताकि चारधाम यात्रा सुचारु रूप से संचालित हो सके।
सरकार का स्पष्ट संदेश
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने साफ किया है कि यदि गैस संकट गहराता है तो सरकार जलौनी लकड़ी को वैकल्पिक ईंधन के रूप में उपलब्ध कराएगी। प्राथमिकता चारधाम यात्रा मार्गों को दी जाएगी, जहां सबसे अधिक जरूरत होती है।
क्या है सरकार की रणनीति?
- यात्रा मार्गों पर अस्थायी लकड़ी डिपो
- प्रभावित वन क्षेत्रों से नियंत्रित कटान
- गैस आपूर्ति की लगातार मॉनिटरिंग
- स्थानीय व्यापारियों को राहत देने पर फोकस












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